शनिवार, 28 मार्च 2026

बीचे खोईर नागपुरी (नवा डहर, नवा जोश)

                                             बीचे खोईर नागपुरी

                   (नवा डहर, नवा जोश)




आयो- बाबा, भाई- बहिन!

रऊरे मन सब के जोहार, सादर प्रणाम।
 

कोनो (कउनो) भी नवा काम के सुरू करेक ले हमर नागपुरी समाज में 'गोड़ लागेक' आउर 'सुमिरन' कर बहुते भारी महतव है। आईझ जब हम ई ब्लॉग कर माध्यम से रउरे मन से जुड़त ही, तो सभे से पईहले उ ऊपर वाला आउर अपन पुरखा मनके गोड़ लागत ही। प्रार्थना खाली कोनो धरम कर काम नी हके, ई मन कर ताकत हके। जब हम कोनो काम के नीक नियत आउर भगवान कर आसीरवाद ले के सुरू करिला, तब हमर मन में एगो अजबे किसिम कर जोश आय जायला। कोनो भी नवा कोलम या नवा काम कर सफलता उकर नीव पर टिकल रहेला। जदि नीव में प्रार्थना आउर मेहनत कर मिलाप होवी, तो भविष्य जरूर उज्ज्वल होवी।

हमर नागपुरी भासा-संस्कृति कर भविष्य उज्ज्वल बनाएक ले हमरे के संगे चलेक परी। जइसन सुरुज कर पहिली किरन अंधार के मेटाए देवेला, ओहे नियर हमर साफ़ सुथरा विचार आउर प्रार्थना हमर डहर कर कांटा मनके हटाए देवेला। ई कोलम, जेकर नाम (नाव) “बीचे खोईर नागपुरी” राखल जात है, कर माध्यम से हमर कोसिस रही कि हम आपन संस्कृति के नवा पीढ़ी तक पहुँचाब आउर सभे कर मंगल कर कामना करब। मेहनत कर पसीना आउर भगवान कर भरोसा, इहे दु गो चीज है, जे कोनो भी साधारण आदमी के असाधारण बनाय देवेला। आउ, आईझ ई नवा सुरूआत संगे हम सभे आपन-आपन क्षेत्र में नाम कमाए कर आउर समाज के आगे बढ़ाय कर संकलप लेईल। तो एहे संकल्प कर साथ आईझ 'बीचे खोईर नागपुरी' कर माध्यम से हम रउरे मनक घर- आंगन आऊर दिल तक पहुँचत ही। हमर नागपुरी समाज में 'खोईर' माने कि गाँव कर बीच कर डहर या चौक, उ जगह हके जहाँ सभे मिल-जुल के बइठयना, दुख-सुख बाँटयना और भविष्य कर ताना-बाना बुनयना। कोनो भी नवा काम के सुरू करेक से पईहले प्रार्थना और उज्ज्वल भविष्य कर कामना करेक हमर पुरखा मनक रीत हके। प्रार्थना खाली हाथ जोड़ेक नी हके, ई आपन भीतर कर बिस्वास के जगाएक कर एगो तरीका हके। जब हम कोनो काम के भगवान कर भरोसा और नीक नियत से सुरू करिला, तब आधा सफलता तो उहे मिल जायला। जइसन दीया बारेक से पईहले बाती और तेल कर जरूरत होवेला, उहे नियर उज्ज्वल भविष्य ले कड़ा मेहनत आऊर भगवान कर आसीरवाद कर जरूरत होवेला।


'
बीचे खोईर नागपुरी' कर माध्यम से हमर कोसिस रही कि हम आपन भासा-संस्कृति कर जोत के जगाए रखब। आईझ कर जुग में जदि हमरे मेहनत कर डहर में चलब और सभे कर भला सोचब, तो हमर भविष्य जरूर उज्ज्वल होवी। ई कोलम हमर और रउरे बीचक एगो अइसन कड़ी बनी, जहाँ हमरे मन आपन माटी कर महक के दुनिया तक पहुँचाब। आऊ, आईझ ई नवा सुरूआत संगे हम सभे आपन-आपन क्षेत्र में नाम कमाएक कर आऊर समाज के आगे बढ़ाय कर संकलप लेईल। मेहनत हमर पहचान बनो आऊर प्रार्थना हमरे कर ताकत।
परमात्मा सभे कर डहर सुगम करबयं। मंगल करबयं आऊर सभे के उज्ज्वल भविष्य देबयं।

                                                            रउरे कर आपन-

                                                                                                                                                                अशोक “प्रवृद्ध”

                                         लेखक, आध्यात्मिक चिन्तक व साहित्यकार

                                                        बीचे खोईर नागपुरी,

                                                     ऊंची तकिया, मुरुनगुर

गुरुवार, 26 मार्च 2026

राम कर महिमा

                                             राम कर महिमा

अशोक "प्रवृद्ध"


अयोध्या कर राजा राम, पुरुषोत्तम भगवान,
जेकर नाम जपले, मिले सब सुख-धाम।
धनुष धरल हाथ में, माथा पर मुकुट साजे,
महिमा अपार जेकर, सारा जग में गाजे।
दीन-दुखारी कर साथी, न्याय कर अवतार,
भक्त मनक बेड़ा के, ऊहे करें पार।
शबरी कर जुठा बेर, प्रेम से जे खायें,
अहिल्या कर पत्थर देही, जेकर छुअले मानुख बनि जायें।
हनुमान कर हिया में, बसें प्रभु राम,
भरत कर भक्ति देखि, झूमे सारा धाम।
रावन कर अहंकार के, जे पल में मिटायें,
सत्य और धरम कर, झंडा के फहरायें।
जय श्री राम जपले, कटे सब कलेश,
आशीर्वाद बरसे जेकर, घर-द्वार और देश।
राम नाम कर डोरी, कबहू ना छूटे,
एहे भक्ति सागर में, भक्त मन डूबे।

महूदी कर जयकारा- अशोक "प्रवृद्ध"

                                             महूदी कर जयकारा

अशोक "प्रवृद्ध"



जाग उठलक बड़कागांव, जागल महूदी कर शान,
भगवा झंडा लहरे गगने, भक्तु मनक बढ़लक मान।
रामभक्त मन जमल हईं, माथा तिलक विराजे,
ढोल, ताशा और नगाड़ा, गूंजत मधुर बाजे।
"जय श्रीराम" कर नारा गूंजे, पर्वत और मैदान,
वीर हनुमान कर कृपा बरसे, बाढ़े सबकर शान।
महूदी कर डहर-डहर में, राम नाम कर शोर,
श्रद्धा और भक्ति कर देखू, चारों बटे जोर।
बाप-दादक ई परंपरा, हमर पुरखा मनक प्यार,
शोभायात्रा निकसत देखू, खुश है सारा संसार।
अस्त्र-शस्त्र कर खेल देखाईं, बीर जवान मन,
मर्यादा पुरुषोत्तम राम कर, राखब हमे सनमान।
एक साथ मिलि-जुलि के, उत्सव ई मनायब,
महूदी कर पावन माटी में, राम धुन बजायब।
जय श्रीराम! जय हनुमान! गूंजे ऊंच आवाज,
बड़कागांव कर सउभे रामभक्त, राखें हमर लाज।

मुरुनगुर कर रामनवमी- अशोक "प्रवृद्ध"

                                     मुरुनगुर कर रामनवमी

-अशोक "प्रवृद्ध"





जाग उठलक मुरुनगुर, जागल प्राचीन सान,
खुदी साहू चबूतरा में, विराजे हनुमान।
बजरंगी कर कृपा बरसे, गूंजे जय श्रीराम,
रामनवमी कर धूम देखू, सउभे गोटे ग्राम।
ढोल-ताशा कर थाप बाजे, लहरत भगवा झंडा,
रामभक्त मनक हिया में, भक्ति कर बरसे ठंडा।
अस्त्र-शस्त्र कर खेल देखाईं, मुरुनगुर कर बीर,
रामकुमार कर संग सउभे, धरें हृदय में धीर।
पुरखा मनक बनावल ई, पावन हनुमान थान,
मुरुनगुर कर माटी में, राम नाम कर सान।
गली-गली और डहर-डहर, गूंजे सुंदर गान,
रामनवमी कर ई उत्सव, हमर असली पहचान।
जय श्रीराम! जय हनुमान! गूंजे ऊंच आवाज,
मुरुनगुर कर रामभक्त, राखें गांव कर लाज।

रामभक्त हनुमान की जय!

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2021

स्त्री शक्ति कर आदर- सम्मान कर उत्सव नवरात्रि -अशोक “प्रवृद्ध”

 

        स्त्री शक्ति कर आदर- सम्मान कर उत्सव नवरात्रि

                                 -अशोक “प्रवृद्ध”

 


 


 

स्त्री के उकर स्वाभिमान, शक्ति कर इयाइद दियाएक आऊर समाज के स्त्री शक्ति कर सम्मान करेक ले प्रेरित करेक कर खातिर स्त्री शक्ति कर आदर- सम्मान कर परब नवरात्रि उत्सव जय अम्बा, जय भगवती, जय माता दी आदि कर उद्घोष आऊर मंत्रोच्चारण  कर साथ पिछला बिफे दिन से शुरू है, आऊर नवरात्रि में देवी पूजन कर ई सिलसिला आवे वाला बिफे दिन तक चली। स्त्री के हमरे कर भारतीय संस्कृति में पूरना ज़माना से हे विशेष आदर- सम्मान मिलल है, आऊर नवरात्रि काल में माय दुर्गा के जगत कर पालन कर्त्ता, विश्व कल्याण कर प्रणेता आऊर दुष्ट आतयायी मनक संहार करेक वाला अधिष्ठात्री देवी माईन के विशेष पूजा- अर्चना करल जाएला। ई नवरात्रि काल में देवी दुर्गा कर नौ अलग- अलग स्वरूप कर पूजा –उपासना करल जाएला। एहे नियर विद्या, बुद्धि, ज्ञान कर देवी सरस्वती आऊर श्री, यश, वैभव, धन कर देवी लक्ष्मी कर भी पूजा –अर्चना कर विधान है। नवरात्रि एक बरिस में चाईर बार पौष, चैत (चैत्र), आषाढ़ आऊर आश्विन मास में प्रतिपदा से नवमी तक मनाल जाएला। चैत्र आऊर आश्विन कर महीना में प्रतिपदा से नवमी तक देवी पूजन कर साथे साथ दसवां दिन क्रमशः श्रीरामनवमी आऊर दशहरा मनाल जाएला। नवरात्रि कर नौ राईत नौ में तीन देवी, महालक्ष्मी, महासरस्वती आऊर महाकाली कर नौ स्वरूप कर पूजा- अर्चा करेक कर परिपाटी है । देवी कर ई नौ स्वरूप कर नाव (नाम) क्रमशः शैलपुत्री (पहाड़ कर बेटी), ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा (चाँद नियर चमकेक वाली), कूष्माण्डा (सम्पूर्ण जगत के गोड़ (पैर) में धारण करे वाली), स्कंदमाता (देव सेनापति स्वामी कार्तिकेय कर माता) कात्यायनी (कात्यायन आश्रम में जन्म लेवे वाली) कालरात्रि (काल कर नाश करेक वाली), महागौरी (चरका, सफेद रंग वाली माता), सिद्धिदात्री (सर्व सिद्धि प्रदायिनी) है । नवरात्रि काल में देवी से सम्बन्धित तीर्थ स्थल कर यात्रा कर भी प्रचलन है । हमरे मनक नागपुरिया क्षेत्र में तो ई नवरात्रि काल में सब गाँव कर पूरब में विराजमान देवी मंडप में भी विधि- विधान से देवी कर नौ स्वरूप कर पूजा- उपासना करेक कर बहुते पुरना परम्परा कायम है।

 

 


हमरे मनक सब धर्म ग्रन्थ में स्त्री के देवी शक्ति कर रूप में पूजनीय मानल जाय हे, आऊर नारी कर सामाजिक महत्व के स्वीकार करते हुए कहल जाहे कि “जहाँ स्त्री कर पूजा होवेला, हुआं देवता मनक वास होवेला” । वेद, पुराण सगरे हें नारी कर आदर -सम्मान इसने हे नखे करल जाय, बल्कि ई सच हके कि स्त्री इसन शक्ति है, जे घनघोर अन्धरिया राईत में भी आपन मधुर मुस्कान से इंजोर कईर सकेला। राजा- प्रजा, ज्ञानी - अज्ञानी सब के जनम देवे वाला नारी कर सम्मान होखे चाहि। पूरने हे जमाना से हमरे कर संस्कृति में स्त्री के शक्ति स्वरूपा, घर कर आत्मा आऊर प्राण मानल जाहे। भगवान स्त्री के एगो जननी कर रूप में सम्मान दे के ई धरती में भेईज हे। माय कर रूप में तो स्त्री ममता कर मन्दिरे हके। ई माये हके जे आपन छऊआ कर लालन- पालन आऊर अस्तित्व बनाएक ले आपन इच्छा के माईर देवेला, आऊर आपन सन्तान में संस्कार कर बीज रोपते हुए उकर में दया, करुणा, प्रेम आदि गुण मनके जनम देवेला। बेटी, बहिन, पुतौह, पत्नी आऊर माय जईसन अलग- अलग रूप में स्त्री सही में एगो परिवार कर आन, बान, शान होवेला। एगो गुणवान बेटी कर रूप में ऊ अपन माता-पिता कर नाम के रोशन तो करबे हें करेला, शादी कर बाद आपन माय- बाप कर घर के छोईड़ के ऊ दूसर कर घर में जाय के हुआं भी आपन त्याग आऊर बलिदान से सब कर दिल जीतेक कर कोशिश करेला। नारी शक्ति पूजन काल नवरात्रि कर नौ दिन में मातृशक्ति कर नौ रूप कर पूजन, स्मरण करल जाएला, नौ ठो कुंवारी मैयां छऊआ के भोजन में आमंत्रित कईर के उनकर पूजा कईर चरण धोई के स्वागत करेक बाद तिलक लगाय के दक्षिणा आऊर उपहार दे के भेजेक कर परिपाटी है।

 

नवरात्रि कर ई नौ दिन तो स्त्री मन के बहुत आदर, बहुते सम्मान मिलेला, लेकिन बाकी कर सालो भईर ई नारी शक्ति विभिन्न मोर्चा में लड़ते हें दिसेना। वेद, पुराण धार्मिक ग्रन्थ मन में तो भले हें स्त्री के देवता कर स्थान देल जाहे, लेकिन आईझ कर समाज में नारी कर स्थिति बेस नी रह्लक। घरे- बाहरे सगरे हें सब जगन कोनो नी कोनो नियर ऊके शोषण कर शिकार होवेक पड़त हे। चाहे ऊ पेट भीतरे हें छऊआ मारेक कर कन्या भ्रूण हत्या कर मामला होवोक, चाहे समाज में महिला कर प्रति लगातार बढ़ल जात अपराध कर मामला होवोक, सब जगन स्थिति बद से बदतर सोचेक वाला बनते जात हे। हालांकि हमरे कर देश में नारी मनक वीरगाथा कर कहनी कर भरमार है, आऊर आईझ भी हमरे मन माता सीता, सती सावित्री, तारा, कुंती, गार्गी, महारानी लक्ष्मीबाई, रानी जीजाबाई, पन्ना धाय जैसन  महान वीरांगना, विदुषी स्त्री मन कर व्यक्तित्व से, त्याग आऊर साहस कर कहनी से प्रेरणा लेते ही, फिर भी ई विदेशी मैकाले शिक्षा कर प्रभाव से देश में साहस आऊर वीरता, देशभक्ति आऊर राष्ट्रप्रेम में कमी स्पष्ट दिसे लाइग हे। सच कहब होले, कोनो भी देश कर भविष्य नारिये में टिकल आहे, काले कि माये है, जे आपन छऊआ के पाईल- पोईस के ऊके संस्कारवान बनाएला, आऊर फिर ओहे छऊआ बाद में देश कर कर्णधार बनेंला। इकरे से समझल जाय सकेला कि नारी कर भूमिका राष्ट्र कर निर्माण में, देश कर विकास में केतना महत्वपूर्ण है। आईझ कर समाज कर दृष्टि से भी देखल से स्त्री अपन प्रयास, प्रयत्न आऊर कोशिश से कहों पाछे नखयं, सब मामला में आगे हैं। बस जरूरत है ऊ मन के सही मौका देवेक कर, बढ़िया अवसर प्रदान करेक कर। नवरात्रि परब मनाएक आऊर मैयां छऊआ पूजेक कर औचित्य तबे पूरा होय सकेला, जब हमरे नारी कर गुण कर सालों भईर ऐ हे नियर सम्मान देवब, स्त्री के दोसर (दोयम) दर्जा कर नागरिक नी समईझ के उकर गुण के हमेशा महत्व देब आऊर ऊ मन के आगे बढेक ले हर सम्भव अवसर प्रदान करब। ई नवरात्रि में आऊ, हमरे संकल्प लेविला कि नारी कर प्रति सम्मान राखेक ले, देवेक ले आपन घर -परिवार से हें इकर शुरुआत करीला। जय स्त्री शक्ति । जय बीचे खोईर नागपुरी। जोहार नागपुरिया । 

 

मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

चमच आऊर चमचई - अशोक "प्रवृद्ध"


चमच आऊर चमचई
-अशोक "प्रवृद्ध"

सबकर चमचा हियाँ

सब कुछ चमचईए में
जे कुछ होवेल हियाँ
चमचई बिना कुछ नहीं
होय सकेला हियाँ
लाईक भी नि मिली
कमेंट्स तो जाय देऊ
चमचई कर ग्रुप है
ग्रुप में रहब होले
चमचई करब होले
लाईक कर वर्षा होई
कमेंट्स भी करबयं
बड़ाई भी करबयं
ग्रुप नखे कोनो नखे
केऊ नहीं पूछबयं
चमचई करे वाला
तो जाय देऊ
लाईक करे वाला
भी नी मिलबयं
कमेंट्स कर तो
अकाले पईड़ जई
देखू जाईन लेऊ
चमचई कर बड़ा
महिमा हियाँ


चमच चमच करते रहू, करू चमचई दिन रात।
चमचई से बढके नहीं, दुसर कुछ करामात ।।









शनिवार, 25 मई 2019

काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह – ई पांच पिशाच रुधिर पीयेंना।



कामक्रोधमदलोभमोह – ई पांच पिशाच रुधिर पीयेंना।



काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह ई पांच पिशाच रुधिर पीयेंना।

अथर्ववेद कर मंत्र – 8/4/22 में उपदेश देल जाए हे-
 उलूकयातुमुत शुशलूकयातुम्, जहि श्वयातुमुत कोकयातुम।
सुपर्णयातुमुत गृध्रयातुम, दृषदेव प्रमशा रक्षइन्द्र।।
- अथर्ववेद 8/4/22

ई वेद मंत्र में उल्लू कर चाल अज्ञानता अर्थात मोह, भेड़िया कर चाल, क्रोध, हंस कर चाल, अहंकार, गिद्ध कर चाल (लोभ) तथा चिड़ा कर चाल (काम) रूपी पांच शत्रु के जितेक कर आह्वान करल जाहे।

वास्तव में ई पांचों राक्षस मनुष्य कर मूल प्रवृत्तिजन्य मनोविकार हकै,  जिनकर त्याईग करके ही मनुष्य जीवन सफल होय सकेला। प्रत्येक मनुष्य में मूल-प्रवृत्ति उग्र या शान्त रूप में अवश्य होवेला। मूल प्रवृत्तिय अपन जन्मजात अथवा प्राकृत रूप मे अत्यन्त विनाशकारी होवेना। मूल प्रवृत्ति प्रदत्त शक्ति है, जे कारण प्राणी किसी विशेष प्रकार कर पदार्थ कर बटे यानी कि ओर ध्यान देवेला आऊर उकर उपस्थिति में विशेष प्रकार कर संवेग कर अनुभूति करेला आऊर ऊ पदार्थ कर सम्बन्ध में एक विशेष प्रकार कर आचरण करेला । ई मूल प्रवृत्तिजन्य मनोविकार कर  विनाशकारी दुष्प्रभाव से इनकर शोध द्वारा बचल जाय सकेला। धर्माचरण, सदाचार, सद्व्यवहार, स्वाध्याय, योग तथा सत्संग से दुष्ट मनोविकारों कर दुष्परिणाम से मुक्त होवल जाय सकेला ।

काम

काम कर प्रवृत्ति या मनोवेग अत्यन्त प्रबल होवेला। काम कुसुम धनु सायक लीने।
 काम कर दुर्दमनीय वेग से मनुष्य बेबस आऊर पस्त होय जायेला ।

स्त्री जातो मनुष्याणां स्त्रीशां च पुरुषेषु वा।
परस्परकृतः स्नेहः काम इव्यभिधीयते।। शार्गधर-1/67

अर्थात- स्त्री में पुरुष कर आऊर पुरुष में स्त्री कर परस्पर स्वाभाविक आकर्षण आऊर स्नेह के काम कहयंना।

से हे ले स्त्री-पुरुष कर समागम से सन्तान की उत्पत्ति होवेला आऊर सृष्टि कर प्रवाह चलते रहेला।

कमोजज्ञे प्रथमो नैनं देवा आपुः पितरो न मर्त्या।

तत स्वत्वर्मास ज्यामान् विश्वहा महांस्तस्मैते ते काम नम इत्कृणोमि।। अथर्ववेद-9/2/19

अर्थात- काम सबसे पहले पैदा होलक । इके न देव जीत सकेना , न पितर आऊर न मनुष्य जीत सकेना । से ले हे काम तोयं सब प्रकार से बहुत बड हीस। एहे ले मोयन तोके नमस्कार करोना ।

श्रीमद्भागवत् गीता में लिखल है-

आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्य वैरिणः।

काम रूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च।।

अर्थात- ज्ञान कर नाश करेक वाला ई काम ही ज्ञानी तथा मुमुक्षु यानी कि मोक्ष कर इच्छुक कर वैरी है।
कामनुराणां न भय न लज्जा
 अर्थात- कामी व्यक्ति को न भय होवेला न लज्जा।

अन्धीकरोमि भुवनं वधिरी करोमिजगत
 अर्थात- काम व्यक्ति के अन्धा व बईहरा कईर देवेला।

राजा भर्तृहरि श्रृंगार शतक कर पईहले हे श्लोक में काम कर निन्दा करते हुए लिख हैं -

हे काम! तोके बार-बार धिक्कार है।

मनुस्मृति में लिखल है-
न जातु काम कामनामुप भोगेन शाम्यति हविषा कृष्ण वर्त्येव भूय एवामि वर्धते।
 अर्थात- कामना के निरन्तर जगाएक से कामना कर शमन नी होव्व्ला। जे नीयर घी कर आहुति से अग्नि प्रचण्ड होवेला, ओहे नीयर  निरन्तर भोग विलास से काम भावना अत्यन्त प्रचण्ड होय जायेला आऊर कामी मनुष्य शक्तिहीन, अकर्मण्य आऊर निन्दनीय बईन जाएला ।

अनियंत्रित काम से व्यभिचार आऊर बलात्कार कर सृष्टि होवेला। आईझ अश्लील साहित्य, विज्ञापन, सिनेमा आऊर  टी.वी. सीरियल में प्रदर्शित उत्तेजक दृश्य, संवाद व संगीत आऊर अर्धनग्न पहनावा, तामसी भोजन व मद्यपान तीव्र कामुकता कर सृष्टि करयंना।

काम प्रवृत्ति के नियंत्रित व परिष्कृत करेक ले उकर मूल में उपस्थित प्रवृत्ति कर उपयोग सद्साहित्य, कला व सुसंगीत कर सृजन में करेक चाही। सात्विक जीवन व्यतीत करते हुए केवल सन्तानोत्पत्ति आऊर वंश वृद्धि करेक ले काम में  प्रवृत्त होवेक चाही। कठोर संयम एवं ब्रह्मचर्य कर पालन से हे काम पर विजय पावल जाय सकेला। गृहस्थ-ब्रह्मचारी भी काम पर नियंत्रण कईर सकेना । महाभारत कर आदि पर्व में युधिष्ठिर कर पूछने पर मंत्री कणिक कहयंना कि -धर्मादर्थश्च कामश्च स धर्म किन्न सेव्यते।
 अर्थात- अर्थ आऊर काम कर सिद्धि धर्म से होवेला ।