राम कर महिमा
अशोक "प्रवृद्ध"
अयोध्या कर राजा राम, पुरुषोत्तम भगवान,
जेकर नाम जपले, मिले सब सुख-धाम।
धनुष धरल हाथ में, माथा पर मुकुट साजे,
महिमा अपार जेकर, सारा जग में गाजे।
दीन-दुखारी कर साथी, न्याय कर अवतार,
भक्त मनक बेड़ा के, ऊहे करें पार।
शबरी कर जुठा बेर, प्रेम से जे खायें,
अहिल्या कर पत्थर देही, जेकर छुअले मानुख बनि जायें।
हनुमान कर हिया में, बसें प्रभु राम,
भरत कर भक्ति देखि, झूमे सारा धाम।
रावन कर अहंकार के, जे पल में मिटायें,
सत्य और धरम कर, झंडा के फहरायें।
जय श्री राम जपले, कटे सब कलेश,
आशीर्वाद बरसे जेकर, घर-द्वार और देश।
राम नाम कर डोरी, कबहू ना छूटे,
एहे भक्ति सागर में, भक्त मन डूबे।