गुरुवार, 26 मार्च 2026

महूदी कर जयकारा- अशोक "प्रवृद्ध"

                                             महूदी कर जयकारा

अशोक "प्रवृद्ध"



जाग उठलक बड़कागांव, जागल महूदी कर शान,
भगवा झंडा लहरे गगने, भक्तु मनक बढ़लक मान।
रामभक्त मन जमल हईं, माथा तिलक विराजे,
ढोल, ताशा और नगाड़ा, गूंजत मधुर बाजे।
"जय श्रीराम" कर नारा गूंजे, पर्वत और मैदान,
वीर हनुमान कर कृपा बरसे, बाढ़े सबकर शान।
महूदी कर डहर-डहर में, राम नाम कर शोर,
श्रद्धा और भक्ति कर देखू, चारों बटे जोर।
बाप-दादक ई परंपरा, हमर पुरखा मनक प्यार,
शोभायात्रा निकसत देखू, खुश है सारा संसार।
अस्त्र-शस्त्र कर खेल देखाईं, बीर जवान मन,
मर्यादा पुरुषोत्तम राम कर, राखब हमे सनमान।
एक साथ मिलि-जुलि के, उत्सव ई मनायब,
महूदी कर पावन माटी में, राम धुन बजायब।
जय श्रीराम! जय हनुमान! गूंजे ऊंच आवाज,
बड़कागांव कर सउभे रामभक्त, राखें हमर लाज।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें