बुधवार, 30 सितंबर 2026

दुःख के अँधेरे चीर, आशा की किरण लाओ,

                                  


दुःख के अँधेरे चीर, आशा की किरण लाओ,



दुःख और विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराना ही सच्ची प्रार्थना है। यह जीवन अमूल्य है, इसे खुल कर जिएं और अपने मन को खुशियों से सराबोर रखें। आप सबों को समर्पित मेरे अंतर्मन से निकली एक सकारात्मक संदेश-

 

दुःख के अँधेरे चीर, आशा की किरण लाओ,
गम के पहाड़ टूटे, तनिक न डरिए।
हँसने से कटती है, राह यह जीवन की,
रो-रो के साँस खोना, ऐसी भूल करिए।।
होठों की ये लाली कहे, खुल के जियो रे मना,
प्रभु की इबादत में, शीश सदा धरिए।
हंसना ही जिन्दगी है, मुस्कुराना वन्दगी है,
कहत "प्रवृद्ध" मन, खुशियों से भरिए।।
-अशोक “प्रवृद्ध”