सोमवार, 5 अक्टूबर 2026

शुभ संध्या

                                                   सवैया 

                     -अशोक "प्रवृद्ध"




पच्छिम के नभ में चमकी दुति, लालिमा सुंदर आज बिराजै।

खग लौट चले निज नीडन को, मृदु घंटन की धुन दूर सुबाजै।
शांत भयो सब ओर प्रपंच, सुहावन रूप मयंक सराजै।
कहे “प्रवृद्ध” अशोक सुनो, शुभ संध्या अनूप महा सुख साजै।