शनिवार, 4 जनवरी 2014

नागपुरी कविता -कथनी - करनी एक होवोक , पाखण्ड नी (ना) लागे । - अशोक "प्रवृद्ध"

नागपुरी कविता -कथनी - करनी एक होवोक , पाखण्ड नी (ना) लागे ।
अशोक "प्रवृद्ध"

ज़ालिम दारु पीयेक दे, रजाई में बैईठ के ,
चाहे ऊ ठाँव (जगह) बताय दे, जहाँ ठण्ड नी (ना) लागे ।।

रेल में पीते पकड़ाय गेलों ,  तो भरलों जुर्माना,
खोजथों ऊ सवारी, जहाँ दण्ड नी लागे ।।

पूँजी निवेश सही जगह, करेक चाही ,
सहियाओं (मित्रों) ! चिट फंड, चीटिंग फण्ड नी (ना) लागे ।।

सत्ता पायके सुख तजयं , कहाँ मानुष अईसन ,
'विनम्रता' वईससन होवेक चाही , जे घमण्ड नी (ना) लागे ।।

सही पात्र के वोट देवेक, है जरूरी बात बहुत,
देखब ! कहीं दिल्ली, झारखण्ड नी (ना) लगे ।।

बईन बैठहयं महंत जब, झाडे़ लाइगहयं उपदेश,
कथनी -;करनी एक होवोक , पाखण्ड नी (ना) लागे ।।






रविवार, 15 दिसंबर 2013

समलैंगिकता पर एगो नागपुरी कविता अशोक "प्रवृद्ध"

समलैंगिकता पर एगो नागपुरी कविता
अशोक "प्रवृद्ध"

इ आईज कर डिमांड हके रउरे के नी बुझई
आब नर नर संगे, मादा मादा संगे जई

सुप्रीम कोर्ट दे रहे एगो अइसन फैसला
सेकर विरोध में खड़ा होय गेलयं खाङ्ग्रेसी साला
गे मन कर  मन बढल है लेस्बियन कर हौसला
भइया संगे मूंछ वाली भउजी घर आवी
इ आईज कर डिमांड हके  रउरे के नी बुझई

खतम भे गेलक आब धारा तीन सौ सतहत्तर
छूटा घुमबयं आब समलैंगिक सभत्तर
रीना आब बईन जई लीना कर लुगाई
इ आईज कर डिमांड हके रउररे के नी बुझई

पछिमे से मिलहेबअइसन इंसपिरेशन
बेसे होवी आब ओतना नी बढी पोपुलेशन
रोपत (बोअत) रहबयं बीज लेकिन कहियो फूल नी फुलाई
इ आज कर डिमांड हके रउरे के नी बुझई

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

नागपुरी कविता - रूपया कहाँ गिरथे ?- अशोक "प्रवृद्ध"

नागपुरी कविता - रूपया कहाँ गिरथे ?
अशोक "प्रवृद्ध"

रूपया कहाँ गिरथे ?
के कहेला -
रूपया गिरथे
गिरथे तो आदमी
गरीबी कर रेखा से नीचे
ऊपर जाथे कीमत , दाम
नीचे आवथे ई रेखा !
रूपया कहाँ गिरथे ?
गिरथे तो साख ई देश कर
सिरमौर बनेक कर ख्वाब देखतेहें देखते
सर  उठायेक लाईक भी नी रहली ।
रूपया नखे गिरत मोर भाई
गिरथे ई देश कर राजनीति
स्कूल में जहर खायके मरल बच्चा मन पर राजनीति
उत्तराँचल कर त्रासदी पर राजनीति
बिहार कर रेल से पिसल आदमी मन पर राजनीति
बलात्कार पर राजनीति
हत्यारा मन पर राजनीति
चीत्कार पर राजनीति
हाहाकार पर राजनीति
हाय रे ई देश कर राजनीति ।
गिरथे मनोबल देश कर
गिरथे  स्वाभिमान देश कर
पाकिस्तान से पडोसी धमकाथयं
चीन से सीमा पर गुर्रात हयं
सब कुछ गिरथे लेकिन ऊ काले नी गिरथे
काले नखे गिरत- जेकर कारण से सब कुछ गिरथेब
नीं रह्लक ई देश के दरकार जेकर
ऊ गिरत काले नखे सरकार  ईकर ।

नागपुरी कविता - ईश्वर राउरेहें दया करू , राउर बिन हामर के है ? - अशोक "प्रवृद्ध"

नागपुरी कविता - ईश्वर राउरेहें दया करू , राउर बिन हामर के है ?
अशोक "प्रवृद्ध"

ईश्वर राउरेहें दया करू , राउर बिन हामर के है ?
दुर्बलता दीनता हरू , राउर बिन हामर के है ??
माता राउरेहें , राउरेहें पिता,बन्धु राउरेहें , राउरेहें सखा ।
राउरेहें हामर आसरा , राउर बिन हामर के है ??
जग के बनाय वाला राउरे , दुखड़ा मिटाय वाला राउरे।
बिगड़ी बनाय वाला राउरे , राउर बिन हामर के है ? ?
राउर दया कर सामने कोनो नखे हमके खबर ।
जऊ तो जऊ हम कने , राउर बिन हामर के है ??
राउर भजन राउरेहें सजन राउरेहें कर धुन राउरे लगन ।
राउरे शरण हामर है केवल सखा राउर बिन हामर के है ??
राउरेहें कर हम धरीला ध्यान राउरेहें से पावीला प्राण हम।
हईर लेऊ तिमिर अज्ञान के  राउर बिन हामर के है ??





शनिवार, 7 दिसंबर 2013

नागपुरी कविता - बे - चारा लालू बेचारा लल्लू -अशोक "प्रवृद्ध"

नागपुरी कविता - बे - चारा लालू
बेचारा लल्लू
अशोक "प्रवृद्ध"

विश्वास नी होवेल
इसन भी होवी
भारत कर नेता भी
आब अन्दर होवी

कतई भी धूरत होवोक
कतई भी होवोक चालू
चाहे मिश्रा  जग्गू होवोक
चाहे यादव लालू

अपराध कहाँ रहे ऊ
बस खाय रहे चारा
चोरी ऊ भी गौ माता से
लेऊ  फंईस गेलक बेचारा

चुपचाप सईह गेलक ऊ
भोली भाली माता गैय्या
चोरी करेक वाला
ग्वाले रहे भैया

दिन उलटी पईड़ गेलक तब
लालू चुनाव हारलक
सरकारी चमचा बईनके तब
मारल - मारल फिरलक

फिर तो कांग्रेस भी
झाईड़ लेलक पल्लू
लालूजी से तब
ऊ बईन गेलक लल्लू

सर्कार कर सहारे तो
ई  देश भी है बेचारा
न्यायालये है आब तो
बस एगो सहारा
बे - चारा   लालू
बेचारा लल्लू  ।

शनिवार, 30 नवंबर 2013

नागपुरी कविता - जोन देश कर - अशोक "प्रवृद्ध"

नागपुरी कविता - जोन देश कर
अशोक "प्रवृद्ध"
जोन देश कर सरकार इसन बदगुमान होवेला ।
ऊ देश कर इज्जत लहूलुहान होवेला।।
जोन देश कर किसान आत्महत्या कईर के मरयनां ।
ऊ देश कर रोटी भी बेईमान होवेला।।
जोन देश कर राजनीति पलेला जाइत (जाति) धरम पर ।
ऊ देश कर जनता सदा कुरबान होवेला।।
जोन देश कर सिपाही , होवैनां महरूम  इज्जत से ।
ऊ देश कर सरहद सदा सुनसान होवेला ।।
जोन देश कर हर  आदमी अनशन में बैठयनां ।
ऊ देश कर सत्ता बनल शैतान होवेला ।।

शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

नागपुरी कविता -लंकाधिपति रावण अगर संपादक होतक


नागपुरी कविता -लंकाधिपति रावण अगर संपादक होतक

लंकाधिपति रावण अगर संपादक होतक
खबर छपुवायेक ले विभीषण छाती पीट - पीट के कान्दतक।

उप सम्पादक मारीच होतक तस्कर प्रमुख प्रभारी
सूर्पणखा नवजवान छोड़ा मनक होतक शील भंग अधिकारी।

सतर्कता मनक खबर कुंभकरण के जातक
संपादक पुत्र मेघनाथ कर पौबारा होय जातक।

ताड़का जी के जे जे लेखक सदचरित्र बतलातयं
मौका मिलते हें  रावण से सम्मानित होय जातयं।

सही खबर छईप जातक होले खेद प्रकाशन आतक
कैसे छपलक,  के छपुवालक, जाँच आयोग बैठातक।

राजा खरदूषण दलाल मन से मिलके दलाली खातक
विज्ञापन कर शुद्ध आय से रावण टाइम्स चमकातक

समुचा मीडिया तब प्रशस्ति में रटन्तु तोता बनतयं
लंकाधिपति रावण अगर संपादक होतक ।